what is stop loss order

Swing Trading क्या है ? और कैसे करे स्विंग ट्रेडिंग यहाँ जाने पूरी जानकारी

Swing Trading शेयर बाजार मे मुनाफा कमाने का एक और बढ़िया विकल्प है। लेकिन स्विंग ट्रेडिंग को बुनियादी तौर पर समझे बिना इसका प्रयोग करने से आपको कभी लाभ नहीं मिल सकता। अगर आप शेयर बाजार मे नए है और निवेश की शुरवात कर रहे है तो आपको इसे अपनाने के पहले ठीक से जानना जरुरी है।

स्विंग ट्रेडिंग क्या है ?(What Is Swing Trading)

  • स्विंग ट्रेडिंग को आप इंट्राडे ट्रेडिंग भी नहीं कह सकते और डिलीवरी ट्रेडिंग भी नहीं कहा जा सकता।
  • स्विंग ट्रेडिंग मे ख़रीदे हुए शेयर 1 दिन से ज्यादा और उसके बाद 2 से 3 दिन या फिर 1 सप्ताह कर होल्ड किये जाते है।
  • इंट्राडे मे होल्ड की गयी शेयर पोजीशन उसी दिन सेल की जाती है और डिलीवरी ट्रेडिंग शेयर खरीदने के बाद उन्हें लम्बे समय तक होल्ड किया जाता है।
  • स्विंग ट्रेडिंग के जरिये छोटे समय मे मुनाफा कामबे का उद्देश्य होता है।
  • ऐसे समय शेयर के छोटे से कीमत के बदलाव पर मुनाफा कमाया जाता है।
  • स्वाँग ट्रेडिंग मे लाभ कमाने के लिए रणनीति के आधार पर ट्रेड किया जाता है।
  • इसे आप डिलीवरी ट्रेडिंग का एक उप प्रकार भी कह सकते है।
  • स्विंग ट्रेडिंग करने वाले निवेशक शेयर की कीमतों का अंदाज़ा लगाने के लिए तकनिकी विश्लेषण करते है
  • इसी समय निवेशक उस शेयर के बारे मे बारीकी से अभ्यास करते है जैसे की कंपनी का प्रोडक्ट और छोटे समय मे कंपनी मे होने वाले बदलाव जो शेयर पर असर डालते है।
  • बिना विश्लेषण किये स्विंग ट्रेडिंग करना काफी जोखिम भरा है विश्लेषण के जरिये स्टॉप लॉस लगाकर जोखिम को कम किया जा सकता है।

कैसे करे स्विंग ट्रेडिंग :(How To Start Swing Trading)

  • सबसे पहले ट्रेडिंग या निवेश करने के लिए आपके पास डीमैट और ट्रेडिंग खाता होना चाहिए जिसे आप किसी भी ब्रोकर के जरिये खोल सकते है।
  • स्विंग ट्रेडिंग करना काफी जोखिम भरा साबित हो सकता है स्विंग ट्रेडिंग करने के लिए आपको सबसे पहले सही शेयर को चुनना चाहिए। (जिसेक लिए स्विंग ट्रेडिंग के रणनीतियों को इस्तेमाल कर सकते है )
  • स्विंग ट्रेडिंग करते समय जब शेयर बाजार मे उतार चढाव होता है ऐसे समय ट्रेड करना चाहिए।
  • स्विंग ट्रेडिंग मे कम समय मे कीमत बढ़ने पर लाभ होता है इसलिए ज्यादा लिक्विडिटी वाले शेयर चुनने चाहिए।
  • शेयर को चुनने के बाद उस शेयर का तकनिकी और कंपनी का अंतर्गत विश्लेषण काफी ज्यादा मायने रखता है।
  • स्विंग ट्रेडिंग के लिए सही शेयर चुना है या नहीं ये जानने के लिए आप स्विंग ट्रेडिंग के लोकप्रिय राणिनीतिया अपना सकते है जो की तकनिकी संकेतो के जरिये शेयर के कीमत के बारे मे अंदाज़ा लगाने मे मदत करते है।
  • आप चार्टिंग के जरिये विश्लेषण के लिए इंट्राडे टूल्स का इस्तेमाल कर सकते है इसी समय सामन्य चार्टिंग से भी 1 सप्ताह के संकेतो का विश्लेषण किया जा सकता है।
  • स्विंग ट्रेडिंग शेयर निवेश करने के बाद आपको आपके विश्लेषण के अनुसार स्टॉप लॉस रखना चाहिए इससे रिस्क कम होती है।
  • स्विंग ट्रेडिंग निवेश समय आपके होल्डिंग पोजीशन को हर समय नजर रखनी चाहिए और हर बदलाव का असर समझाना चाहिए।
  • आखिर मे आपके स्विंग ट्रेड रणनीति के अनुसार मुनाफा आने पर होल्डिंग बेचनी चाहिए।
  • स्टॉप लॉस हिट होने के बाद होल्डिंग स्क्वायर ऑफ कर लेनी चाहिए।

कब करनी चाहिए स्विंग ट्रेडिंग :(When Is Best Time To Do Swing Trading)

  • स्विंग ट्रेडिंग निवेश के लिए कोई तय समय नहीं है ये आपके ऊपर निर्भर करता है की आपने शेयर को कितनी अच्छी तरह से जांचा है।
  • जब आप शेयर का तकनिकी विश्लेषण करते है तब आपको शेयर के ट्रेंड का पता लग जाता है।
  • इसका मतलब शेयर करेक्शन करते समय अपना ट्रेडन बदल देता है ऐसे समय स्विंग ट्रेडिंग अच्छा रिजल्ट दे सकती है और लॉस होने की जोखिम भी कम होती है।
  • इस ट्रेंड और करेक्शन को जानना स्विंग ट्रेडिंग मे काफी जरुरी होता है जिसके लिए अलग अलग प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है।
  • निवेशक अलग अलग संकेतो का इस्तेमाल करके स्विंग हाई लौ ,मूविंग एवरेज ,ओवरबॉट ओवरसोल्ड की जानकारी को देखकर निर्णय लेते है।

स्विंग ट्रेडिंग के लाभ :(Benifits Of Swing Trading)

  • स्विंग ट्रेडिंग एक छोटे समय याने 1 हफ्ते से लेकर 1 महीने तक की जाती है इसमे छोटे समय मे आप ट्रेडिंग मुनाफा कमा सकते है।
  • शेयर के लम्बे समय तक का रिसर्च करने की जरुरत नहीं पड़ती है क्यों की आपको इसमे सिर्फ कुछ दिनों के लिए ही निवेश करना होता है।
  • स्विंग ट्रेडिंग मे जोखिम है लेकिन इंट्राडे के मामले मे यह जोखिम काफी कम है।
  • अच्छी शेयर मे स्विंग ट्रेडिंग करने पर ज्यादा लॉस होने की संभावना कम होती है क्यों की इसे आप रणनीति बदलकर होल्ड भी कर सकते है।
  • स्विंग ट्रेडिंग मे आपको 1 से 2 दिन मे अच्छा मुनाफा भी मिल जाता है जो की इंट्राडे ट्रेडिंग आपको नहीं देती है।

स्विंग ट्रेडिंग के लिए लोकप्रिय रणनीति :(Best Strategies For Swing Trading)

स्विंग ट्रेडिंग के लिए रणनीति बनाकर कम समय मे अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.रणनीति मे मुनाफा कमाने की कीमत तय की जाती है इसी समय स्टॉप लॉस पर भी ध्यान दिया जाता है जिससे जोखिम नियंत्रित होती है।

यहां बताया गया है कि 'वोलैटिलिटी फ़िल्टर' के साथ स्टॉप लॉस लेवल कैसे सुधारें!

स्टॉप लॉस एक ऐसा उपकरण है जिसके बिना व्यापारी लंबे समय तक खेल में बने रहने के लिए व्यापार नहीं कर सकते। यह न केवल हमारे नुकसान को कम करने में मदद करता है बल्कि जब हम अपनी स्थिति से बाहर निकलते हैं और बाजार हमारे खिलाफ चलता रहता है तो भावनात्मक राहत भी देता है। हालाँकि, हमेशा ऐसा नहीं होता है और कई बार बाजार हमारे स्टॉप लॉस को हिट कर देता है, हमें बाहर निकाल देता है और वापस पलट देता है (जिसे व्हिपसॉ कहा जाता है) जिसे पचाना थोड़ा मुश्किल होता है।

हर ट्रेडर को एक बात अपने दिमाग में लिखनी चाहिए कि व्हिपसॉ से बचा नहीं जा सकता। ऐसा समय आएगा और व्हिपसॉ से बचने का एकमात्र तरीका ट्रेडिंग बंद करना है! हालांकि, हमारे प्रवेश/निकास स्तरों पर कुछ फ़िल्टर लागू करके इन व्हिपसॉ को कुछ हद तक कम करने के कुछ तरीके हैं।

कई बार एक औसत स्टॉप लॉस क्या है बाजार हमारे स्टॉप लॉस को ट्रिगर करता है, केवल तुरंत वापस लौटने के लिए, जो प्रमुख रूप से बढ़ी हुई अस्थिरता के कारण होता है, जो कि अनियमित चालों को बढ़ावा देता है जो सामान्य नहीं हैं। इस बढ़ी हुई अस्थिरता के परिणामस्वरूप तेज स्पाइक्स (ऊपर/नीचे) होते हैं जो आपके स्टॉप लॉस को हिट करते हैं जो एक अच्छी दूरी पर भी रखा जाता है।

अत्यधिक अस्थिरता के कारण अपने स्टॉप लॉस को मारने की संभावना को कम करने का एक तरीका अस्थिरता फ़िल्टर का उपयोग कर रहा है और मेरा व्यक्तिगत पसंदीदा एटीआर (औसत ट्रू रेंज) है। एटीआर एक संकेतक है जिसे एक निश्चित समय अवधि में स्टॉक की औसत गति को दर्शाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। उदाहरण के लिए, यदि ITC (NS: ITC ) का वर्तमान 14-दिवसीय ATR 6.6 है, तो इसका मतलब है कि ITC ने पिछले 14 सत्रों में INR 6.6 (दिशा के बावजूद) की औसत चाल दी है।

यह जानकारी का एक उपयोगी टुकड़ा है क्योंकि यह आपको यह मापने का एक बहुत ही उचित तरीका देता है कि आपका स्टॉप लॉस सीएमपी से बहुत करीब/बहुत दूर या आदर्श दूरी पर है या नहीं। उपरोक्त उदाहरण को जारी रखते हुए, अगर मुझे पता है कि आईटीसी आसानी से एक दिन में 6.6 रुपये स्थानांतरित कर सकता है तो सीएमपी से 6.6 रुपये की दूरी के भीतर किसी भी स्टॉप लॉस को आसानी से केवल एक स्पाइक के साथ हटाया जा सकता है।

तो आप अस्थिरता में अचानक वृद्धि के कारण व्हिपसॉ की संभावना को कैसे कम कर सकते हैं? यह आसान है। बस मूल SL से INR 6.6 घटाएं जो आपको आपके बाहर निकलने के लिए एक नया निचला स्तर देगा (लंबी स्थिति के मामले में)। इस तरह आपका स्टॉप लॉस स्टॉक के औसत उतार-चढ़ाव से कम हो जाएगा। चूंकि आपका एसएल कम हो जाएगा, यदि यह ट्रिगर हो जाता है, तो आपको मूल की तुलना में अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा, जाहिर है और इसलिए प्रवेश करने से पहले ऐसे फिल्टर पर भी विचार किया जाना चाहिए ताकि आप अपनी बेट को उचित आकार दे सकें।

व्हिपसॉ को कम करने के लिए ऐसे कई फिल्टर हैं। एक अन्य उदा. एक समय-आधारित फ़िल्टर है जिसमें आप स्थिति से बाहर निकलने से पहले कीमत को अपने SL के नीचे बनाए रखने के लिए 1 या दो दिन (या जो कुछ भी) प्रतीक्षा करते हैं।

what is stop loss order स्टॉप लॉस आर्डर क्या होता है

what is stop loss order

what is stop loss एक औसत स्टॉप लॉस क्या है order

नमस्ते दोस्तों। आज हम जानने वाले है की what is stop loss order .मतलब स्टॉप लोस आर्डर क्या होता है। और साथ ही हम जानने वाले है की स्टॉप लॉस लगाने के क्या क्या फायदे है। और स्टॉप लॉस ना लगाने के क्या नुकसान है। अपने स्टॉप लॉस नाम तो बहोत बार सुना होगा। लेकिन कभी आपने जानने की कोशिश नहीं की की ये होता क्या है। किससे जुड़ा है। और क्या काम आता है स्टॉप लॉस। तो आज हम इन्ही सब चीजों के बारे में समझने वाले है।तो चलिए समझते है what is stop loss order .

what is stop loss order / स्टॉप लॉस आर्डर क्या होता है

stop loss order वो होता है जहा शेयर बाजार में आप intraday trading करते हो तो आपका नुकसान बच्याने के लिए जो आर्डर लगायी जाती है। उसेही स्टॉप लॉस आर्डर कहा जाता है। शेयर बाजार में आप ट्रेडिंग करते हो तो आपको मुनाफा कमाना होता है। जब आप कोई शेयर खरीदते हो। और अगर आपके विरुद्ध वो शेयर जाता है। तो आप आपके लॉस के मुताबिक स्टॉप लॉस आर्डर लगा सकते हो। तो स्टॉप लॉस एक आपका नुक़सान बचने का काम करता है।

इसे अभी उदाहरण के तौर पर समझते है। समझ लीजिये आपको कोई १०० रुपये का शेयर ख़रीदा। और आपको लगता है की ये शेयर ११० रुपये तक ऊपर जा सकता है। लेकिन आपको शंका है की कही ये निचे ना आजाये। इसीलिए आप स्टॉप एक औसत स्टॉप लॉस क्या है लॉस लगाते हो ९८ रुपये का। इसका मतलब अगर शेयर की प्राइज ऊपर जाने की बजाय निचे आती है। तो स्टॉप लॉस लगाने की वजह से आपको सिर्फ २ रुपये का नुकसान होगा। क्युकी स्टॉप लॉस लगाने से आपका शेयर अपने आप ९८ रुपये पे बिक जायेगा।

types of stop loss स्टॉप लॉस के प्रकार

अभी आपको शेयर बाजार में स्टॉप लॉस (what is stop loss orde)क्या होता है ये तो समझ आ गया होगा। अभी हम स्टॉप लॉस के प्रकार कितने और कोनसे होते है। ये समझते है। स्टॉप लोस के दो प्रकार होते है। एक होता है primary stop loss .और एक होता है trailing stop loss . तो जानते हे इनके बारे में विस्तार में।

१.primary stop loss

ये एक फिक्स स्टॉप लॉस होता है। मतलब आप एक फिक्स रेंज में इस स्टॉप लॉस को लगते हो। जैसे की आप इस स्टॉप लॉस को स्टॉक प्राइज के सपोर्ट के निचे लगते हो। ज्यादातर अनुभवी ट्रेडर्स ऐसाही करते है। लेकिन जो शेयर बाजार में नए होते है उन्हें तो स्टॉप लॉस मालूम ही नहीं होता। और जिनको मालूम होता है। वो कभी उसे लगाते ही नहीं है। क्यकि शेयर की प्राइज ऊपर निचे होती रहती है। तो उन्हें लगता है की हमारा स्टॉप लॉस हिट होकर फिरसे प्राइज ऊपर जायेगा। इस सोच की वजह से उन्हें और भी ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है।

प्राइमरी स्टॉप लॉस लगाने का भी एक वसूल होता है। यानि की उसकी भी स्ट्रैटर्जी होती है। आप कह भी स्टॉप लॉस नहीं लगा सकते। अगर आपने ऐसा किया तो आपका नुकसान भले ही कम हो लेकिन नुकसान होना तय है।

ऐसेही महत्वपूर्ण पोस्ट

इसे एक उदाहरण से समझते है। एक स्टॉक हे जिसे आपको खरीदना है। लिकन आप देख रहे है की शेयर की प्राइज काफी ऊपर निचे हो रही है। तो सिंपल स्ट्रैटर्जी है। आप ऐसी प्राइज ढूंडो जहा से स्टॉक लगातार छू के वापस ऊपर की और जा रहा हो। तो उस छूने वाली प्राइज पर आपको शेयर को खरीदना है। तो आपका स्टॉप लॉस हमेश उसके सपोर्ट यानि की लगातार चुने वाली प्राइज के निचे ही लगाना होगा। उसेही primary stop loss कहा जाता है।

२.trailing stop loss

ये एक स्तालान्तरित स्टॉप लॉस है। यानि की जिस स्टॉप लॉस को आप आपके प्रॉफिट के मुताबिक स्तालान्तरित करते हो उन्हें ही traling stop loss कहा जाता है। मतलब की अगर आपने शेयर को ख़रीदा है। और अगर शेयर प्राइज ऊपर की और जा रही होती है तो आप आपका निचे लगाया हुआ स्टॉप निचे से उठाकर ऊपर की और रख सकते हो।

चलिए इसे भी उदाहरन के तौर पर समझते है। समझो आपने xyz कंपनी के स्टॉक को १०० रुपये में ख़रीदा। और ९८ रुपये पर स्टॉप लॉस लगाया। ज्यादा नुकसान न हो इसीलिए। और अभी आपको लगता है की शेयर की प्राइज ११० रुपये जा सकती है। और जैसे ही शेयर की प्राइज ऊपर जाने लगती है।और १०५ रुपये होती है। तो आपने लगया हुआ स्टॉप लॉस आप ९८ रुपये से उठाकर १०३ रुआपये भी रख सकक्ते हो। या आपके हिसाब से १०४ रुपये भी रख सकते हो। उसेही traling stop loss कहा जाता है।

आपको समझ आ ही गया होगा की what is stop loss order और स्टॉप लॉस प्रकार के बारे में अभी हम स्टॉप लॉस के फायदे और नुकसान के बारे में विस्तार में समझते है।

stop loss order lagane ke fayde

स्टॉप लॉस लगाने से आपका नुकसान आप के काबू में होता है। स्टॉप लॉस से आप चाहे उतनाही नुकसान आपको हो सकता है उसके ऊपर आपको नुकसान नहीं हो सकता। मार्किट में अचानक मंदी आती है। और जिस प्राइज पर आपने स्टॉप लॉस लगाए है। उसकी प्राइज पर आपकी पोजीशन एग्जिट हो जाती है।

trailing stop loss का तो नहुत बड़ा फायदे है। जैसे की मैंने बताया जब आप ट्रेडिंग के लिए शेयर खरीदते हो। तो ऊपर जाने पर आप अपना निचे का स्टॉप ऊपर लगा सकते हो।जिससे आपको लॉस होगा ही नहीं। कुछ न कुछ प्रॉफिट तो आपको ट्रेलिंग स्टॉप लॉस से मिल ही जाता है।

stop loss na lagane ke nuksan

अगर आपने किसी स्टॉक में पोजीशन ली है। और अचानक से बाजार में मंदी आती है। और आपने ख़रीदा हुए शेयर में अचानक से गिरावट होने लगती है। तो उस टाइम पर अगर आपने स्टॉप लॉस नहीं लगाया। तो फिर आपका बड़ा नुकसान उठाना पडत है। जब तक आप उस शेयर को बेचने एक औसत स्टॉप लॉस क्या है लगोगे तबतक तो शेयर काफी गिर गया होगा।

बहुत लोगो की मानसिकता होती है की शेयर निचे गया है ऊपर भी आएगा। और वो स्टॉप लॉस नहीं लगते। वो फिर भी मार्केट से एग्जिट नहीं करते। और फिर उनका ज्यादा नुकसान दिखने लगता है। तो और ज्यादा वो डरने लगते है। और इतना लॉस में नहीं ले सकता। ऐसा वो सोचने लगते है। लेकिन उनका और भी ज्यादा लॉस हो जाता है। पूरा कैपिटल ही ख़तम हो जाता है।

दरअसल ऐसा दस बार में से एक बार होता है की आपका निचे गया हुआ स्टॉक फिर से ऊपर आया हो। और आपका फायदा हुआ हो। लेकिन आप हर बार ये अंदाजा लेके नहीं चल सकते की स्टॉप लॉस नहीं लगाना शेयर निचे जाके ऊपर आएगा। क्युकी हर बार वो शेयर ऊपर आएगा ही। इस सोच की वजह से लोगो को और भी ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है।

what is stop loss order को और बारीकीसे इंग्लिश में समझ ने के लिए आप investopedia.com पर जाकर पढ़ सकते हो।

निष्कर्ष

शेयर बाजार ट्रेडिंग करना एक रिस्क भरा काम है। उनके के अनुभव की जरुरत है। और शेयर बाजार में बहुत उतर चढाव होते रहते है। ऐसे में ट्रेडिंग करते समय अगर आप stop loss नहीं लगते हो ऐसे समय पर आपको भारी नुकसान देखना पड सकता है। तो ट्रेडिंग में हमेश स्टॉप लॉस लगाकर ही अपनी पोजीशन बनाये। ताकि रिस्क आपकी कम रहे।

यकीं है की आज की ये what is stop loss order पोस्ट आपको काफी पसंद आयी होगी। और मदतगार साबित हुयी होगी। और अगर आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगे तो कृपया इसे अपने फॅमिली और दोस्तों के साथ शेयर जरूर कीजियेगा। ताकि उन लोगो को भी what is stop loss order के बारे में अच्छे से पता चले।

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1 दिन में भी पैसे से बना सकते हैं पैसा, बाजार में ऐसे करें इंट्राडे ट्रेडिंग

क्या कोई ऐसी जगह है, जहां 1 दिन के लिए पैसे लगाकर मोटी कमाई की जा सकती है.

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क्या कोई ऐसी जगह है, जहां 1 दिन के लिए पैसे लगाकर मोटी कमाई की जा सकती है.

Tips For Day Trading: क्या कोई ऐसी जगह है, जहां 1 दिन के लिए पैसे लगाकर मोटी कमाई की जा सकती है. अगर आपके मन में भी यह सवाल है तो इसका जवाब हैं हां. शेयर बाजार ऐसी जगह है, जहां महज कुछ घंटों की ट्रेडिंग में पैसे से पैसा बना सकते हैं. सही और सटीक शेयर चुनने में सफल रहते हैं तो हाथों हाथ जेब में मोटी रकम आ सकती है. ऐसा संभव है इंट्राडे ट्रेडिंग में, जिसमें बाजार निवेशकों को 1 दिन में भी बंपर मुनाफा कमाने का मौका देता है.

बाजार में एक ही ट्रेडिंग डे पर शेयर खरीदने और बेचने को इंट्रा डे ट्रेडिंग कहते हैं. इसमें सुबह पैसा लगाकर दोपहर तक अच्छी कमाई की जा सकती है. यहां शेयर खरीदा तो जाता है लेकिन उसका मकसद निवेश करना नहीं, बल्कि एक दिन में उसमें होने वाली बढ़त से मुनाफा कमाना होता है. ध्यान रहे कि इसमें जरूरी नहीं है कि आपको फायदा ही हो.

कैसे कर सकते हैं इंट्राडे ट्रेडिंग

अगर शेयर बाजार में डे-ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो इसके लिए पहले आपको डीमैट अकाउंट और एक ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाना होता है. इस अकाउंट में आप या एक औसत स्टॉप लॉस क्या है तो ब्रोकर को फोन पर ऑर्डर देकर शेयर का कारोबार कर सकते हैं या ऑनलाइन भी खुद से ट्रेडिंग कर सकते हैं.

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कैसे चुनें सही स्टॉक

  • सिर्फ लिक्विड स्टॉक में ट्रेडिंग करें, 2 या 3 ऐसे स्टॉक चुन सकते हैं.
  • वोलेटाइल स्टॉक से दूर रहें.
  • अच्छे कोरेलेशन वाले शेयरों में करें खरीददारी.
  • शेयर का चुनाव करने के पहले बाजार का ट्रेंड जरूर देख लें, मार्केट के ट्रेंड के खिलाफ न जाएं.
  • रिसर्च के बाद जिन शेयरों को लेकर कांफिडेंट हैं, उनमें निवेश करें.
  • शेयर खरीदने के पहले यह तय करें कि किस भाव में खरीदना है और उसका लक्ष्य कितना है. स्टॉप लॉस जरूर लगाएं.
  • जैसे ही लक्ष्य पूरा हो, प्रॉफिट बुकिंग करें.

कितने पैसों की पड़ती है जरूरत

इंट्रा डे में आप किसी शेयर में कितनी भी रकम लगा सकते हें. शेयर बाजार में नियम है कि जिस दिन शेयर खरीदा जाता है, उस दिन पूरा पैसा नहीं देना होता है. नियम के तहत जिस दिन शेयर खरीदा जाता है, उसके 2 ट्रेडिंग दिनों के बाद पूरा भुगतान करना होता है. फिर भी आपको शेयर के भाव का शुरू में 30 फीसदी रकम निवेश करना होता है.

कैसे मिलता है फायदा

इसका उदाहरण 29 अक्टूबर यानी मंगलवार को शेयर बाजार में होने वाली ट्रेडिंग से ले सकते हैं. टाटा मोटर्स के शेयरों में निवेश करने वालों के लिए मंगलवार का दिन बेहतर साबित हुआ. पॉजिटिव सेंटीमेंट जुड़ने के बाद कंपनी के शेयर में 16 फीसदी तक तेजी आई है. इसके पहले 3 अक्टूबर को पॉजिटिव सेंटीमेंट बनने से ही यस बैंक में करीब 29 फीसदी तेजी आई.

एक्सपर्ट का मानना है कि शेयर बाजार का अधिकांश कारोबार डे ट्रेडिंग का ही होता है, लेकिन फिर भी सावधानी के साथ कारोबार करना चाहिए. शेयर का चुनाव करने के पहले बाजार का ट्रेंड जरूर देखना चाहिए. मार्केट के ट्रेंड एक औसत स्टॉप लॉस क्या है के खिलाफ न जाएं. शेयर खरीदने के पहले यह तय करें कि किस भाव में खरीदना है और उसका लक्ष्य कितना है. स्टॉप लॉस जरूर लगाएं.

(Discliamer: हम यहां इंट्राडे कारोबार के बारे में जानकारी दे रहे हैं, न कि निवेश की सलाह. शेयर बाजार के अपने जोखिम होते हैं, इसलिए निवेश के पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.)

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